कटनी नगर निगम में पीएम आवास योजना घोटाला: वसूली की बजाय ठेकेदार को अतिरिक्त भुगतान, 95 लाख का सरकारी नुकसान

विशेषज्ञों का सुझाव है कि यदि 2024 के भुगतानों से कटौती की जाती, तो हानि की पूर्ण भरपाई हो सकती थी।

कटनी नगर निगम में पीएम आवास योजना घोटाला: वसूली की बजाय ठेकेदार को अतिरिक्त भुगतान, 95 लाख का सरकारी नुकसान

कटनी, 27 जनवरी 2026: प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत कटनी नगर निगम की झिंझरी परियोजना में कथित अनियमितताओं का एक नया खुलासा हुआ है।

नगर निगम के दस्तावेजों के अनुसार, अधिकारियों ने 95.86 लाख रुपये की सरकारी हानि की वसूली करने के बजाय ठेकेदार कंपनी को अतिरिक्त भुगतान जारी रखा, जिससे भ्रष्टाचार के आरोप और गहरा गए हैं। यह मामला अब केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि सुनियोजित अनियमितता का प्रतीत होता है।

वसूली के दावों के बीच ठेकेदार को ‘बोनस’ जैसे भुगताननगर निगम अधिकारियों ने सीएम हेल्पलाइन और अन्य जांचों में दावा किया था कि पुरानी अनियमितताओं की वसूली आगामी बिलों से की जाएगी।

हालांकि, रिकॉर्ड बताते हैं कि वसूली की बजाय ठेकेदार को अतिरिक्त राशि जारी की गई:जनवरी 2024: कंपनी को 56 लाख रुपये का भुगतान किया गया।जुलाई 2024: अतिरिक्त 30.36 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए।कुल 86.36 लाख रुपये के इन भुगतानों से सवाल उठता है कि यदि 95.86 लाख रुपये की वसूली बाकी थी, तो इन राशियों से क्यों नहीं समायोजित किया गया?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सीधे तौर पर सरकारी धन की हानि को नजरअंदाज करने का प्रमाण है।दोहरी नीति का खुलासा: आश्वासन vs. हकीकतअधिकारियों की कार्यशैली में दोहरापन स्पष्ट है:एक ओर, कागजों पर वसूली और समायोजन की बात कर वरिष्ठ अधिकारियों को संतुष्ट किया गया।दूसरी ओर, ठेकेदार को लगातार भुगतान जारी रखा गया, जिससे कंपनी को लाभ पहुंचा।

परियोजना में कुल 105 करोड़ रुपये की लागत से 1,512 मकान बनाने की योजना थी, लेकिन 6 वर्षों से यह रुकी हुई है। पूर्व आयुक्त सत्येंद्र धकरे ने 7 करोड़ रुपये के अतिरिक्त भुगतान को स्वीकार किया था और वसूली के लिए नोटिस जारी किए थे।इसके अलावा, 100 करोड़ रुपये मूल्य की भूमि को मात्र 25 करोड़ में बेचने के आरोप भी लगे हैं, जो सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा रहा है।

वर्तमान आयुक्त तपस्या परिहार ने कहा है कि शिकायतों पर जांच चल रही है और प्रक्रिया कानूनी रूप से सही पाई गई है, लेकिन ठेकेदार ने काम रोक दिया था। कंपनी के सीईओ राज श्रीवास्तव ने आरोपों को निराधार बताया और परियोजना को पुनर्जीवित करने की बात कही। यह भी आरोप है कि इसके अतिरिक्त, एनकेजे क्षेत्र में 980 परिवारों को बिना बिजली, पानी और स्ट्रीट लाइट के मकान सौंपे गए, जिससे लाभार्थी परेशान हैं।

शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।आगे क्या? जांच की मांग और सवालशिकायतकर्ताओं के नए तथ्यों ने नगर निगम की ‘समय की कमी’ वाली दलील को कमजोर कर दिया है। अब सवाल उन अधिकारियों पर उठ रहे हैं जिन्होंने भुगतान फाइलों पर हस्ताक्षर किए। क्या ये भुगतान बिना किसी ‘लाभ’ के संभव थे?

विशेषज्ञों का सुझाव है कि यदि 2024 के भुगतानों से कटौती की जाती, तो हानि की पूर्ण भरपाई हो सकती थी।

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