कटनी: स्लीमनाबाद रेलवे स्टेशन पर ‘रेल रोको’ आंदोलन, हजारों ग्रामीणों ने जताया आक्रोश; रेलवे ने दिया लिखित आश्वासन

रेलवे की ओर से सकारात्मक आश्वासन मिलने के बावजूद, ग्रामीण अब ठोस कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

कटनी (मध्य प्रदेश), 10 मार्च 2026 – कटनी जिले के स्लीमनाबाद रेलवे स्टेशन पर आज सुबह से ही हजारों ग्रामीणों, छात्रों, व्यापारियों और जनप्रतिनिधियों ने एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव की लंबे समय से चली आ रही मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। ग्राम विकास संघर्ष समिति के नेतृत्व में आयोजित इस ‘रेल रोको’ आंदोलन में लोगों ने रेलवे प्रशासन पर जायज मांगों को अनसुना करने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की और स्टेशन परिसर में जमकर विरोध जताया।मांग क्या है?प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग स्लीमनाबाद स्टेशन पर प्रमुख ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित करना है।

खास तौर पर निम्न ट्रेनों में स्टॉपेज की मांग की जा रही है:रीवा–इतवारी एक्सप्रेसजबलपुर–अंबिकापुर इंटरसिटीजबलपुर–सिंगरौली इंटरसिटीग्रामीणों का कहना है कि स्लीमनाबाद एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र है और आसपास के दर्जनों गांवों (लगभग 40-50 गांवों) के लोग यहां से यात्रा करते हैं। ट्रेनों के न रुकने से छात्रों, मरीजों, व्यापारियों और रोजगार के लिए जाने वालों को भारी असुविधा होती है।

उन्हें कटनी या जबलपुर तक अतिरिक्त यात्रा करनी पड़ती है, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ जाते हैं।आंदोलन का रूप और सुरक्षा व्यवस्थासुबह 8 बजे से शुरू हुए आंदोलन में क्षेत्र के अपडाउनर्स, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए। रेल रोको की पूर्व चेतावनी के चलते स्टेशन पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। जीआरपी, आरपीएफ के साथ ही स्लीमनाबाद, बहोरीबंद, उमरिया पान और ढीमरखेड़ा थानों की पुलिस टीमें मौके पर तैनात रहीं।

रेलवे का जवाब और आश्वासनआंदोलन की तीव्रता को देखते हुए जबलपुर डीआरएम कार्यालय से अधिकारी स्लीमनाबाद पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को लिखित आश्वासन दिया कि:रीवा–इतवारी एक्सप्रेस का प्रायोगिक (ट्रायल बेसिस) ठहराव रेलवे बोर्ड से मंजूर हो चुका है। जल्द ही इसकी अधिसूचना जारी की जाएगी।जबलपुर–अंबिकापुर और जबलपुर–सिंगरौली इंटरसिटी ट्रेनों के स्टॉपेज का प्रस्ताव भी रेलवे बोर्ड को भेज दिया गया है।इस लिखित आश्वासन के बाद ग्राम विकास संघर्ष समिति ने आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया।

हालांकि, ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो वे बड़े स्तर पर दोबारा आंदोलन करेंगे।स्थानीय प्रतिक्रियाएक ग्रामीण ने कहा, “हम सालों से मांग कर रहे हैं, लेकिन अब धैर्य खत्म हो रहा है। छात्रों और मरीजों की परेशानी देखकर मन दुखता है।” आंदोलनकारियों ने बताया कि यह मांग नई नहीं है, बल्कि वर्षों पुरानी है और अब समय आ गया है कि रेलवे इसे गंभीरता से ले।यह घटना क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी की कमी को उजागर करती है, जहां सैकड़ों गांवों के लोग बेहतर ट्रेन सुविधा की प्रतीक्षा में हैं।

रेलवे की ओर से सकारात्मक आश्वासन मिलने के बावजूद, ग्रामीण अब ठोस कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

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